एक पैर छोटा, एक बड़ा
क्या इलाज संभव है?
हाँ। हड्डी को धीरे-धीरे लंबा करने की तकनीक (लिम्ब लेंथनिंग) से छोटे पैर की लंबाई बढ़ाई जा सकती है।
पैर छोटा क्यों हो जाता है?
- • बचपन में हड्डी टूटना या ग्रोथ प्लेट (बढ़ने वाली जगह) पर चोट
- • बचपन में हड्डी या जोड़ में इन्फेक्शन
- • पोलियो
- • जन्म से हड्डी छोटी या अधूरी होना
- • पुरानी टूटी हड्डी जो छोटी होकर जुड़ गई
छोटे पैर से क्या परेशानी होती है?
लंगड़ाकर चलना, कमर और घुटने में दर्द, जल्दी थकान, जूते में ऊँचा तला लगवाना, और कई बार रीढ़ का टेढ़ा होना।
इलाज कैसे होता है?
- 1पूरे पैर का खड़े होकर एक्स-रे और कंप्यूटर पर नाप-तौल
- 2ऑपरेशन में हड्डी पर फ्रेम (या कुछ मामलों में अंदर लगने वाली रॉड) लगाई जाती है और हड्डी को एक जगह से काटा जाता है
- 3लगभग एक हफ़्ते बाद रोज़ लगभग 1 मिलीमीटर पैर लंबा किया जाता है – मरीज़ या घरवाले यह घुमाना सीख जाते हैं
- 4पूरी लंबाई आने के बाद नई हड्डी पक्की होने तक फ्रेम लगा रहता है
- 5फिर छोटी सी सर्जरी से फ्रेम निकाला जाता है और फिज़ियोथेरेपी चलती है
कितना समय लगता है?
कई महीने। मोटे तौर पर हर सेंटीमीटर लंबाई के लिए एक महीना या उससे ज़्यादा फ्रेम लगा रहता है – बड़ों में ज़्यादा। कुछ मरीज़ों में फ्रेम के साथ अंदर रॉड लगाने से फ्रेम का समय कम हो जाता है।
ज़रूरी बातें
- • रोज़ की एक्सरसाइज़ और फिज़ियोथेरेपी बहुत ज़रूरी है, वरना घुटना या एड़ी जकड़ सकती है
- • नियमित एक्स-रे और जाँच के लिए आना ज़रूरी है
- • कितनी लंबाई सुरक्षित है, यह जाँच के बाद ही तय होता है
सिर्फ़ लंबाई बढ़ाने (हाइट) के लिए ऑपरेशन?
बिना किसी बीमारी के सिर्फ़ लंबाई बढ़ाने का ऑपरेशन बड़ा फ़ैसला है, जिसमें लंबा समय और ख़तरे शामिल हैं। इसके लिए पूरी जाँच और आमने-सामने विस्तार से बात ज़रूरी है।